बेशुमार दौलत से भरपूर क्षेत्रीय अखबारों के तेजी से हो रहे प्रसार के दम पर भारतीय प्रिंट मीडिया इन दिनों अच्छी स्थिति में दिख रहा है और इसने घरेलू टीवी चैनलों को पीछे छोड़ दिया है। निवेशक अच्छा रिटर्न मिलने के बाद मीडिया कंपनियों में ही पैसा लगाना चाह रहे हैं। अखबारों के नए संस्करण शुरू होने, अधिग्रहण और कंसॉलिडेशन जैसे गतिविधियों की वजह से इस क्षेत्र में इन दिनों काफी चहल-पहल है।
दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स और संदेश जैसी स्थानीय प्रिंट मीडिया कंपनियों का तेजी से क्षेत्रीय विस्तार हो रहा है और ये नए सिरे से निवेश करने में जुटी हैं। क्षेत्रीय स्तर के अग्रणी अखबारों की ओर से विस्तार योजनाओं के लिए 1500 करोड़ रुपये का निवेश करने का अनुमान है। पिछले दो महीने में दैनिक जागरण और हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स ने कुल मिलाकर 575 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश जुटाए हैं। जागरण समूह ने मुंबई स्थित मिड डे मल्टीमीडिया के प्रकाशन कारोबार को भी खरीद लिया है।
हालांकि टीवी के क्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। जानकारों के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर ऐड रेवेन्यू की वृद्धि में स्थिरता के चलते प्रिंट मीडिया का तेजी से क्षेत्रीय विस्तार हो रहा है। प्राइसवाटरहाउसकूपर्स में मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्रैक्सिट की एसोसिएट डायरेक्टर स्मिता झा कहती हैं, ‘‘राष्ट्रीय स्तर के अखबारों की अच्छी सर्कुलेशन के बावजूद इन्हें कम बचत हो रही है जबकि रीजनल मार्केट में 50 हजार से एक लाख प्रतियां बेचने वाले अखबार को काफी सर्कुलेशन रेवेन्यू मिल जाता है। यही वजह से है कि अधिकतर क्षेत्रीय अखबार इस समय आक्रामक मूड में दिख रहे हैं।’’ झा के मुताबिक विज्ञापनदाता अपनी अगली मीडिया योजना पर विचार करते समय इस बदलाव को जरूर ध्यान में रखेंगे और अपना अधिकतर बजट क्षेत्रीय अखबारों को आवंटित करेंगे।
दैनिक भास्कर ने झारखंड और बिहार से अपने संस्करण शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। एचटी मीडिया की हिंदी इकाई हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स अब नई कंपनी के तौर पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो गई है और यह हिंदी भाषी क्षेत्रों में विस्तार करने की योजना बना रही है। जागरण के लिए मिड डे का प्रकाशन कारोबार की खरीद महज एक शुरुआत है। यह समूह क्षेत्रीय मीडिया कंपनियों में हिस्सा खरीदकर रणनीतिक भागीदारी करने की तैयारी में है।
देश में अखबारों को हर साल विज्ञापन से दस हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता है। इसमें 35 फीसदी से अधिक रीजनल मार्केट से आता है। जानकारों का कहना है कि बड़े क्षेत्रीय अखबारों का विस्तार होने से यह हिस्सा और भी बढ़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय अखबारों को काफी फायदा होगा। देश में करीब 550 टीवी चैनलों और पांच हजार केबल ऑपरेटरों की तुलना में करीब 70 हजार पंजीकृत अखबार हैं।
अपने कारोबार पर खतरा भांपते हुए एसोसिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया ने अखबारों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा 26 फीसदी से बढाए जाने के लिए दबाव बनाना शुरू किया है। एसोसिएशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एफडीआई की सीमा 26 फीसदी से बढाकर 49 फीसदी किए जाने के लिए हमने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखा है ताकि हम बड़ी कंपनियों से मुकाबला कर सकें।’ (साभार: भास्कर.कॉम)