साधो, संपादक है दल्ला. (यानी दलाल नंबर वन…)
उसका तो अब काम दलाली, करता नैतिकता का हल्ला.
उसका चेहरा जान गया है, अब तो यारो गली-मोहल्ला.
बात नहीं है पहले जैसी, झाडा इसने मिशन से पल्ला.
मंत्री, अफसर से है रिश्ते, मालिक का ससुरा दुमछल्ला.
बिकी कलम हाय बेचारी. जाने क्या हो ईश्वर-अल्ला.
गुणगान केवल सत्ता का, तान लिया घर अब बहु-तल्ला.
उपरोक्त पंक्तियां दरअसल एक टिप्पणी है, जिसे मोहल्लालाइव ब्लाग से साभार लिया गया है। इन रोचक पंक्तियों के लेखक हैं : गिरीश पंकज (at MohallaLive.com )